उत्तराखंड - नदी तंत्र (Uttarakhand - River System)
उत्तराखंड की
भौगोलिक संरचना में यहाँ का नदी तंत्र (River System) एक रीढ़ की हड्डी के समान
है। हिमालय के हिमनदों से निकलने वाली ये नदियाँ न केवल राज्य की प्यास बुझाती हैं,
बल्कि उत्तर
भारत के विशाल मैदानों को भी उपजाऊ बनाती हैं। उत्तराखंड के जल प्रवाह को मुख्य
रूप से तीन बड़े नदी तंत्रों में विभाजित किया जा सकता है: गंगा नदी तंत्र,
यमुना नदी
तंत्र और काली नदी तंत्र।
राज्य की सबसे
लंबी नदी काली (शारदा) है, जबकि जल धारण
क्षमता (Water Volume) के मामले में अलकनंदा सबसे बड़ी नदी
मानी जाती है।
1. गंगा नदी प्रवाह तंत्र (Ganga River System)
गंगा नदी का
निर्माण दो प्रमुख धाराओं, भागीरथी और अलकनंदा के संगम से होता है।
- भागीरथी
नदी: यह उत्तरकाशी जिले में स्थित गंगोत्री हिमनद (गोमुख) से 3,900
मीटर की ऊंचाई से निकलती है। गोमुख से देवप्रयाग तक
इसकी लंबाई 205 किमी है। टिहरी में भिलंगना नदी इसकी प्रमुख सहायक नदी
है।
- अलकनंदा
नदी: इसे 'विष्णुगंगा' भी कहा
जाता है। यह चमोली के संतोपथ शिखर से निकलती है। देवप्रयाग तक पहुँचने से पहले यह 195
किमी की दूरी तय करती है।
पंच प्रयाग (The Five Confluences):
अलकनंदा नदी
मार्ग में अन्य नदियों से मिलकर पाँच प्रसिद्ध प्रयागों का निर्माण करती है,
जो हिंदू धर्म
में अत्यंत पवित्र हैं:
- विष्णुप्रयाग: अलकनंदा + पश्चिमी धौलीगंगा।
- नंदप्रयाग: अलकनंदा + नंदाकिनी।
- कर्णप्रयाग: अलकनंदा + पिंडर।
- रुद्रप्रयाग: अलकनंदा + मंदाकिनी।
- देवप्रयाग: अलकनंदा + भागीरथी (यहाँ से यह आधिकारिक रूप से 'गंगा'
कहलाती है)।
उल्लेखनीय है
कि 4 नवंबर 2008 को गंगा को भारत की राष्ट्रीय नदी घोषित किया गया
था।
2. यमुना नदी प्रवाह तंत्र (Yamuna River System)
यमुना नदी
उत्तराखंड के पश्चिमी भाग की जीवनरेखा है और राज्य की पश्चिमी सीमा का निर्धारण
करती है।
- उद्गम: यह उत्तरकाशी में बंदरपूँछ पर्वत के दक्षिण-पश्चिमी
ढाल पर स्थित यमुनोत्री हिमनद से निकलती है। उत्तराखंड में इसकी कुल लंबाई 136
किमी है।
- सहायक
नदियाँ: हनुमान गंगा, अगलाड़ और कमल गाड़
इसकी छोटी सहायक नदियाँ हैं।
- टोंस नदी: यह यमुना की सबसे बड़ी सहायक नदी है। यह हिमाचल प्रदेश
से आने वाली 'रूपिन' और उत्तराखंड की 'सूपिन' नदियों के
संगम से बनती है। टोंस नदी उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश के बीच प्राकृतिक सीमा
बनाती है और डाकपत्थर के पास यमुना में मिल जाती है।
3. काली (शारदा) नदी प्रवाह तंत्र (Kali River System)
काली नदी
उत्तराखंड के सबसे पूर्वी हिस्से में बहती है और भारत व नेपाल के बीच
अंतरराष्ट्रीय सीमा बनाती है।
- उद्गम और
लंबाई: यह पिथौरागढ़ के पास जैक्सर श्रेणी के कालापानी (व्यास आश्रम) नामक
स्थान से निकलती है। स्कंदपुराण में इसे 'श्यामा
नदी' कहा गया है। 252 किमी की लंबाई के साथ
यह उत्तराखंड की सबसे लंबी नदी है।
- प्रमुख
सहायक नदियाँ:
- सरयू
नदी: यह कुमाऊँ की सबसे पवित्र नदी मानी जाती
है और काली नदी को सर्वाधिक जल प्रदान करती है। यह बागेश्वर के सरमूल से
निकलकर पंचेश्वर में काली से मिलती है।
- पूर्वी
धौलीगंगा: यह लिस्सर और दारमा नदियों के संगम से
बनती है और खेला नामक स्थान पर काली में विलीन होती है।
- गोरी
गंगा: मिलम हिमनद से निकलने वाली यह नदी जौलजीवी
में काली से मिलती है, जहाँ प्रसिद्ध 'जौलजीवी मेला'
लगता है।
- लधिया
नदी: यह उत्तराखंड की अंतिम नदी है जो चूका
नामक स्थान पर काली नदी से मिलती है।
नदियों का क्षेत्रीय वर्गीकरण
उत्तराखंड की
नदियों को उनके उद्गम स्थल के आधार पर भी समझा जा सकता है:
- महान
हिमालय से निकलने वाली: भागीरथी, अलकनंदा,
मंदाकिनी, पिंडर, यमुना और काली। ये
नदियाँ सदानीरा (Perennial) हैं क्योंकि इन्हें ग्लेशियरों से निरंतर जल मिलता है।
- मध्य
हिमालय से निकलने वाली: पश्चिमी रामगंगा,
सरयू, कोसी, गोमती, नयार और गौला। ये नदियाँ मुख्य रूप से वर्षा और पहाड़ी
सोतों पर निर्भर करती हैं।
उत्तराखंड का
यह नदी तंत्र न केवल बिजली उत्पादन (पनबिजली परियोजनाओं) के लिए महत्वपूर्ण है,
बल्कि यहाँ की
धार्मिक पर्यटन अर्थव्यवस्था का आधार भी है।
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