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शोध या अनुसंधान के प्रकार .1


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उत्तराखंड की भौगोलिक स्थिति और विस्तार

भौगोलिक स्थिति और विस्तार उत्तराखंड भारत के उत्तर-मध्य भाग में स्थित एक हिमालयी राज्य है , जिसे अपनी अद्वितीय भौगोलिक संरचना के कारण ' देवभूमि ' के रूप में जाना जाता है। यह मुख्य रूप से मध्य हिमालय का हिस्सा है। 1. अक्षांशीय और देशांतरीय विस्तार राज्य की भौगोलिक अवस्थिति उत्तर-पूर्वी गोलार्द्ध में है। इसका अक्षांशीय विस्तार 28°43 ′ से 31°27 ′ उत्तरी अक्षांश तक है , जो कुल 2°44′ के अंतराल को दर्शाता है। वहीं , देशांतरीय विस्तार 77°34 ′ से 81°02 ′ पूर्वी देशांतर के मध्य स्थित है , जिसका कुल विस्तार 3°28′ है। यह स्थिति इसे सामरिक और जलवायु की दृष्टि से महत्वपूर्ण बनाती है। 2. आकार और क्षेत्रफल उत्तराखंड का भौगोलिक स्वरूप लगभग आयताकार है। राज्य का कुल क्षेत्रफल 53,483 वर्ग किमी है , जो भारत के संपूर्ण क्षेत्रफल का 1.69% हिस्सा कवर करता है। दूरी: पूर्व से पश्चिम की लंबाई 358 किमी और उत्तर से दक्षिण की चौड़ाई 320 किमी है। धरातलीय स्वरूप: राज्य का अधिकांश हिस्सा विषम है। कुल क्षेत्रफल का 86.07% (46,035 वर्ग किमी) पर्वतीय है , जबकि मा...

शोध या अनुसंधान की विशेषताएँ

  शोध या अनुसंधान की विशेषताएँ क्रम विशेषता विस्तृत वर्णन 1 शोध वस्तुनिष्ठ ( Objective) होता है शोध हमेशा तथ्यों और प्रमाणों पर आधारित होता है , इसमें व्यक्तिगत राय या पूर्वाग्रह का स्थान नहीं होता। निष्कर्ष पूर्णतः वस्तुनिष्ठ होते हैं और सार्वभौमिक रूप से मान्य रहते हैं। 2 शोध क्रमबद्ध ( Systematic) होता है शोध यादृच्छिक नहीं , बल्कि एक क्रमबद्ध और संगठित प्रक्रिया है जिसमें समस्या चयन , परिकल्पना निर्माण , डेटा संग्रह व परिणाम विश्लेषण जैसे चरण शामिल होते हैं। 3 शोध में प्रतिकृति ( Replicability) का गुण होता है अन्य शोधकर्ता समान परिस्थितियों में शोध को दोहराकर वही परिणाम प्राप्त कर सकें , इसे प्रतिकृति कहते हैं। यह विश्वसनीयता और प्रामाणिकता का सबसे बड़ा प्रमाण है। 4 शोध तार्किक ( Logical) होता है शोध तर्कपूर्ण ढंग से आगे बढ़ता है। परिकल्पना से लेकर निष्कर्ष तक हर चरण तार्किक रूप से जुड़ा होता है। इससे शो...