उत्तराखंड की भौगोलिक विविधता उत्तराखंड की भौगोलिक विविधता यहाँ की जलवायु , मिट्टी और वनस्पति में स्पष्ट रूप से झलकती है। ऊँचाई में परिवर्तन के साथ ही यहाँ का पूरा पारिस्थितिकी तंत्र बदल जाता है। आइए , उत्तराखंड की जलवायु , मृदा संरचना और समृद्ध वनस्पति का विस्तार से विश्लेषण करते हैं। 1. जलवायु और ऋतुएँ ( Climate and Seasons) उत्तराखंड की जलवायु मुख्य रूप से ऊँचाई ( Altitude) और पर्वतीय ढालों की दिशा पर निर्भर करती है। जैसे-जैसे हम मैदानों से हिमालय के शिखरों की ओर बढ़ते हैं , तापमान और वायुदाब में भारी गिरावट आती है। 1.1 जलवायु प्रदेश का वर्गीकरण ऊँचाई के आधार पर राज्य को 6 जलवायु क्षेत्रों में विभाजित किया गया है: उपोष्ण जलवायु ( Sub-tropical): यह 900 मीटर तक की ऊँचाई वाले तराई , भाबर और दून क्षेत्रों में पाई जाती है। यहाँ गर्मियों में अत्यधिक गर्मी होती है। गर्म शीतोष्ण जलवायु: 900 से 1,800 मीटर की ऊँचाई पर। यहाँ चीड़ के वनों की प्रचुरता होती है और मौसम सुहावना रहता है। शीत शीतोष्ण जलवायु: 1,800 से 3,000 मीटर तक। यहाँ सर्दियाँ लंबी...
उत्तराखंड - नदी तंत्र ( Uttarakhand - River System) उत्तराखंड की भौगोलिक संरचना में यहाँ का नदी तंत्र ( River System) एक रीढ़ की हड्डी के समान है। हिमालय के हिमनदों से निकलने वाली ये नदियाँ न केवल राज्य की प्यास बुझाती हैं , बल्कि उत्तर भारत के विशाल मैदानों को भी उपजाऊ बनाती हैं। उत्तराखंड के जल प्रवाह को मुख्य रूप से तीन बड़े नदी तंत्रों में विभाजित किया जा सकता है: गंगा नदी तंत्र , यमुना नदी तंत्र और काली नदी तंत्र। राज्य की सबसे लंबी नदी काली (शारदा) है , जबकि जल धारण क्षमता ( Water Volume) के मामले में अलकनंदा सबसे बड़ी नदी मानी जाती है। 1. गंगा नदी प्रवाह तंत्र ( Ganga River System) गंगा नदी का निर्माण दो प्रमुख धाराओं , भागीरथी और अलकनंदा के संगम से होता है। भागीरथी नदी: यह उत्तरकाशी जिले में स्थित गंगोत्री हिमनद (गोमुख) से 3,900 मीटर की ऊंचाई से निकलती है। गोमुख से देवप्रयाग तक इसकी लंबाई 205 किमी है। टिहरी में भिलंगना नदी इसकी प्रमुख सहायक नदी है। अलकनंदा नदी: इसे ' विष्णुगंगा ' भी कहा जाता है। यह चमोली के संतोपथ ...